Tuesday, 11 March 2014

 हकीकत में मुहब्बत की नयी दुनिया बसाऊंगा
चमकते चाँद और तारों से मैं उसको सजाऊंगा
मैं तुझको भूल जाऊँगा
मुबारक हो तुझे वह हमसफ़र जो तेरी चाहत है
मुझे तुझ से मुहब्बत थी मुझे तुझसे मुहब्बत है
मगर सोचा है धीरे धीरे ख्वाबों को जलाऊंगा
मैं तुझको भूल जाऊँगा
खिलेंगे मेरे आँगन में भी ग़ुंचे शादमानी के
उड़ेंगे रंग हर जानिब खुदा की मेहरबानी के
उन्ही रंगों से एक सूरत अनोखी सी बनाऊंगा
मैं तुझको भूल जाऊँगा
मुझे मालूम है तुझको भूलना कितना मुश्किल है
मगर मैं क्या करूँ जानां कि मेरे पास भी दिल है
मैं दिल के हर वरक़ से नाम अब तेरा मिटाऊंगा
मैं तुझको भूल जाऊँगा
खुद का फ़ज़ल है मैं गुल हूँ पत्थर  हो नहीं सकता
किसी भी बेवफा को मैं मयस्सर हो नहीं सकता
मेरे अपने हैं बाक़ी उम्र मैं उनको हंसाऊंगा
मैं तुझको भूल जाऊँगा

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